किचन गार्डन | kitchen garden | किचन गार्डन में कौन कौन सी फसलों का प्रयोग किया जा सकता है | Kitchen Gardening | What Is Kitchen Gardening In Hindi

किचन गार्डन क्या हे.What Is Kitchen Garden.

किचन गार्डन (kitchen garden) को रसोई उद्यान अर्थात गृह वाटिका भी कहते है। किचन गार्डन का अर्थ है घर, छत या बालकनी के आसपास खुली खाली जमीन में फल, फूल या सब्जियां उगाना। वर्तमान में ताजी और अच्छी गुणवत्ता वाली सब्जियां उच्च कीमत चुकाने के बावजूद उपलब्ध नहीं हैं क्योंकि उनमें अत्यधिक कीटनाशक अवशेष या सीवेज से जहरीले रसायन हो सकते हैं। विविधः प्रकार के सब्जी,फलो या फ्लावर को उगाया जाता हे.उत्पादन हेतु परिवार के पोषण स्तर को बढ़ाने के लिए करना होता है। इसके द्वारा आर्थिक लाभ भी मिलते है। सब्जियों का चयन इच्छा अनुसार किया जाता है। घर के चारों और खाली पड़ी भूमि में बनाना होता  है। गमलो में भी फल-फूल एवं शाक-सब्जी का उत्पादन किया जाता है। यह मॉर्डन टेक्नोलोजी और आपकी जेब के लिए बेहतर है। मैं आपको किचन गार्डन क्या है इसके बारेमे साझा करूंगा। किचन गार्डन के बारेमे अधिकतर जानने के लिए पढ़ते रहें।





















किचन गार्डन बनाने के लिए आवश्यक उपकरण।

किचन गार्डन बनाने के लिए  गमले ,प्रो बैग, खुरपी, दांतली, कुदाल, सी कटर, पानी के जार आदि की आवश्यकता होती है।




किचन गार्डन कैसे बनाएं – How To Make Kitchen Garden 
 
  • अपने घर पर आसानी से किचन गार्डन कैसे तैयार किया जाता है आइये जानते हैं
  1. आपको ऐसे स्थान का चयन करना होगा कि आप जिस भी जगह का चुनाव कर रहे हैं वहां उचित धूप आती हो.
  2. किचन गार्डनिंग करने के लिए आप विभिन्न डिजाइनिंग आईडिया का विचार कर सकते हैं।
  3. गमले के साइज व पौधों के बीच एक निश्चित दूरी का ख़ास ध्यान रखें
  4. एक ही गमले में अधिक बीज को न बोएं।
  5. पौधों की बौनी किस्म (dwarf varieties) को छोटे गमलों में तथा लम्बे पौधों को बड़े गमलों में लगाएं।
  6. अपना किचन गार्डन तैयार करने के लिए सही मिट्टी व खाद का उपयोग करें।
  7. किचन गार्डनिंग के लिए ऐसी सब्जियों का चुनाव करें, जिन्हें उगाना आसान हो और लम्बे समय तक उपज देती हों।


किचन गार्डन में कौन कौन सी फसलों का प्रयोग किया जा सकता है. kitchen garden plants

किचन गार्डन (kitchen garden) या गृह वाटिका में शाक-सब्जियों को तीन बार बोया जा सकता है,  निम्नलिखित है –भिंडी, लौकी, करेला, टिंडा, तोरई, बैंगन, टमाटर, ग्वार, लोबिया, मिर्ची, अरबी,बैंगन, सरसों, मटर, प्याज, लहसुन, आलू, टमाटर, शलजम, फूलगोभी, बंदगोभी, चना,भिंडी, ककड़ी, खीरा, लौकी, तोरई, टिंडा, अरबी, तरबूज, मतीरा, खरबूजा, बैंगन आदि सब्जियों की खेती की जा सकती है ।



किचन गार्डन (kitchen garden) में बीज द्वारा बुवाई (by seeds )

  • मूली, शलजम, मेथी, पालक, खीरा, करेला, लौकी, कद्दू, टिंडा, सेम, भिंडी आदि सब्जियों के बीज मिट्टी में सीधे ही बोये जाते हैं।
  •  बुवाई से पहले बीजों का थीरम या केपटान 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से बीजोपचार कर लेना अच्छा रहता है। 
  • अच्छी व जानी-मानी कृषि कंपनियों के बीज लेने पर सामान्यता बीज पहले से ही उपचारित होते हैं  
  • सब्जियों के बीजों की बुवाई पंक्तियों में करनी चाहिये तथा कतार से कतार एवं पौधे से पौधे की बीच उचित स्थान छोड़ना चाहिये। 
  •  फैलने वाले पौधो के लिए कतार से कतार की दूरी अधिक रहती है ताकि पौधे को बढ़ने के लिए उचित स्थान मिल सके। विभिन्न सब्जियों में पौधे से पौधे की दूरी एवं कतार से कतार की दूरी अलग-अलग होती है ।



किचन गार्डन (kitchen garden) में खाद एवं उर्वरक (fertilizers and manures for kitchen garden )-

  • खाद एवं उर्वरक का अच्छी पैदावर प्राप्त करने में अत्यधिक महत्व है। 
  • इसके लिए आवश्यक है कि मिट्टी में कार्बनिक खाद का प्रयोग हो।
  • खाद मिट्टी की दशा सुधारती है व पौधों को आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति भी करती है।
  • इसके लिए गृह-वाटिका के एक कोने में कम्पोस्ट खाद का निर्माण भी किया जा सकता है।



निराई-गुड़ाई व खरपतवार नियंत्रण(weed control ) 

  • सब्जियों के पहले 40-50 दिनों तक खरपतवार मुक्त रखना आवश्यक है 
  • अतः समय-समय पर खुरपी द्वारा निराई गुड़ाई करते रहें। उर्वरक की दो अन्य खुराकें 1 महीने बाद तथा अगली खुराक समान्यता अगले 1-1.5 महीने बाद फूल आने के समय दी जाती है। 






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